राजस्थान में कब खुलेगी शिक्षण संस्थान कोचिंग व कॉलेज- राजस्थान सरकार द्वारा 30 नवंबर तक स्कूल कॉलेज व कोचिंग चालू नहीं करने का आदेश दिया है
लंबे समय से बंद पड़ी स्कूले से बच्चों को बहुत नुकसान हो रहा है अगर ऐसे ही आगे डेट बढ़ती रहेगी जीरो सेशन होना तय है
शिक्षा बोर्ड ने 9वी से 12वी तक 40 % सिलेबस हटा दिया है
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तीन राज्यों में बजी स्कूलों की घंटी
कोरोना महामारी के सबसे करीब 7 माह से बंद स्कूलों की घंटी सोमवार को बज गई उत्तर प्रदेश पंजाब की टीम सहित कई राज्यों में 9वीं से 12वीं की कक्षा में लगी
अधिकांश जगह कोरोना संक्रमण से बचाने के दिशा निर्देशों का सख्ती से पालन किया गया जहां प्रवेश के समय स्क्रीनिंग सैनिटाइजर वह मास्क सोशल डिस्टेंसिंग का अच्छी तरीके से पालन किया गया
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बच्चों को अभिभावकों की लिखित इजाजत के साथ ही कक्षा में प्रवेश किया गया हालांकि इन सबके बावजूद स्कूल में छात्रों की संख्या बहुत कम नजर आए कई राज्यों में छात्रों को हॉल में सोशल डिस्टेंसिंग में बैठाया गया कई स्कूलों ने निर्देश दिया है कि अभिभावक खुद बच्चे को स्कूल आए और लेकर जाए
बच्चे को स्कूल यूनिफार्म में पूरी बाजू की शर्ट फुल पैंट और जूते मोजे पहनकर भेजी वही उत्तर प्रदेश में स्कूलों को दो पारियों में कक्षाएं लगाने की अनुमति है सुबह 8.50 से दोपहर 11.50 तक कक्षा 9 और 10 12:20 से 3:20 तक कक्षा 11 और 12 कक्षा चलेगी
इस माह दसवीं दिन 75000 से कम केस
देश में पिछले 24 घंटों में कुल 55722 नए केस और 579* से संक्रमित ओं की मौत हुई है इस तरह कुल शंकर मित्रों की संख्या 7550273 और कुल 114110 संघमित की मौत हो चुकी है स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार राहत की बात यह है कि 9 अक्टूबर के बाद से लगातार दसवें दिन है जब 24 घंटे में पछतावा 1000 से कम नहीं किस मिली है
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्कूल फीस को लेकर दिया आदेश, अभिभावकों में कन्फजन
कोरोनावायरस को किस को लेकर राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को लेकर अभिभावकों में कन्फ्यूजन पैदा हो गया है दरअसल आदेश को लेकर दोनों पक्षों में कन्फ्यूजन पैदा हो गया दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की अलग-अलग राय है जस्टिस एस पी शर्मा द्वारा सोमवार को दिए गए इस आदेश की दोनों पक्ष अपनी-अपनी तरह से व्याख्या कर रहे हैं कानून के जानकारों का कहना है कि आदेश की भाषा स्पष्ट न होने से मतभेद होना स्वाभाविक है दरअसल राज्य सरकार के साथ जुलाई के बीच स्थगन के आदेश को कैथोलिक एजुकेशन सोसायटी ने हाईकोर्ट को चुनौती दी थी दिनेश यादव का कहना है कि कोर्ट ने निजी स्कूलों को राहत देते हुए पूरी फीस का 70% ट्यूशन फीस मानती है यह चार्ज करने की छूट दी है इसे पेरेंट्स को तीन किस्तों में जमा करवाना होगा दूसरी ओर राज्य सरकार की पैरवी करने वाले अतिरिक्त अधिवक्ता राजेश मर्सी का कहना है कि ऐसा नहीं है कि सो कोर्ट का ऑर्डर कहना है कि निजी स्कूल संचालन केवल ट्यूशन फीस का 70% चार्ज कर सकते हैं जो की बहुत बड़ी राशि नहीं होती पूरी फीस का 70% वसूलने की बात कही भी ऑर्डर में नहीं है ऐसे में अभिभावकों के सामने यह कंफ्यूजन पैदा हो गया कि आखिरकार उन्हें स्कूल में कितनी फीस जमा करानी है
इस कंफ्यूजन को लेकर हाईकोर्ट के अधिवक्ता प्रति कासलीवाल का कहना है कि आदेश में स्पष्ट नहीं है कि इसके ऑपरेटिंग पार्ट की भाषा पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है ऐसे में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं में तिल होना शुभ है क्या कंफ्यूजन दूर करने के लिए कोई भी पक्ष अदालत से आदेश स्पष्ट करने का अनुमोदन कर सकता हैl
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